प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत गरीब और बेघर परिवारों को मकान उपलब्ध कराने का सपना अभी भी अधूरा नजर आ रहा है। शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें भुवन सिंह आदिवासी और पोसन आदिवासी जैसे कई लाभार्थी पात्रता साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

नगर परिषद रन्नौद की ओर से जारी पत्र में साफ लिखा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करते समय परिवार की वार्षिक आय 3 लाख से कम होनी चाहिए, परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर पक्का घर नहीं होना चाहिए और आवेदन की कट-ऑफ डेट 31 दिसंबर 2020 रखी गई है।

दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि—

यदि कोई अविवाहित सदस्य कमाता है, तो उसे अलग परिवार माना जाएगा।

एक ही परिवार से एक ही सदस्य आवेदन कर सकता है।

आवेदन में गलत जानकारी देने पर कार्यवाही भी हो सकती है।


लाभार्थी भुवन सिंह आदिवासी का कहना है कि गरीब और आदिवासी परिवार वर्षों से अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा बार-बार नियमों का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पात्रता की जाँच में पारदर्शिता नहीं बरती जाती और जिनको वास्तव में मकान की जरूरत है, वे आज भी भटक रहे हैं, जबकि दबंग और प्रभावशाली लोग लाभ उठा रहे हैं।

जनता की मांग:
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि आवास योजना की पात्रता जाँच को निष्पक्ष बनाया जाए और उन गरीबों को प्राथमिकता दी जाए जिनके सिर पर आज भी पक्की छत नहीं है।