बाढ़ से बाजार को 100% फीसदी नुकसान, प्रशासन ने माना केवल 15%, कई किसानों को नहीं मिलेगा मुआवज़ा
हाल ही में आई बाढ़ ने स्थानीय बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। दुकानों में रखा सामान, गोदामों का माल और सड़कों पर फैले व्यापारिक प्रतिष्ठान—सब कुछ पानी में डूब गया। व्यापारी संगठनों का दावा है कि बाजार को सौ प्रतिशत यानी पूरी तरह नुकसान हुआ है, लेकिन प्रशासन की रिपोर्ट में इसे मात्र 15 प्रतिशत माना गया है।
इस नुकसान का सबसे बड़ा असर स्थानीय किसानों पर पड़ा है। बाढ़ के कारण उनकी खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, खेतों में पानी भर गया और बुवाई से लेकर कटाई तक की सारी मेहनत बेकार हो गई। बावजूद इसके, प्रशासन का कहना है कि निर्धारित मापदंड पूरे न करने वाले किसानों को मुआवज़ा नहीं मिलेगा। इससे बड़ी संख्या में किसान राहत राशि से वंचित रह सकते हैं।
ग्रामीणों और व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा किया गया सर्वे अधूरा और गलत है। कई असली पीड़ितों के नाम सूची में नहीं हैं, जबकि जिनका नुकसान कम था, वे लाभार्थी सूची में शामिल हो गए। अब पीड़ित व्यापारी और किसान दोनों

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