खाद के 1000 कट्टों पर कब्जे की जंग, 650 किसान भिड़े, MP में मचा बवाल, एक-दूसरे के फाड़े कपड़े
शिवपुरीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शासन प्रशासन भले ही पर्याप्त खाद होने का दावा कर रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि खाद किसानों की आवश्यकता से काफी कम है। यही कारण है कि आए दिन खाद गोदामों में किसान आपस में ही उलझ रहे हैं। उनका झगड़ा हो रहा है। प्रशासन इन व्यवस्थाओं को संभालने में नाकाम साबित हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण करैरा के बाद अब कोलारस में भी नजर आया। यहां कृषि उपज मंडी स्थित डबल लाक गोदाम में खाद लेने के लिए पहुंचे किसान आपस में भिड़ गए।
एक आधारकार्ड पर मिलना थी 5 बोरी खाद
बताया जाता है कि कोलारस में प्रशासनिक अमले ने डीएपी के वितरण के लिए दो दिन पहले 650 किसानों को टोकन वितरण किया था। अभी तक किसानों को एक आधार कार्ड पर पांच कट्टे दिए जा रहे थे। ऐसे में अनुमान था कि 650 किसानों के लिए कम से कम 3250 कट्टों की आवश्कयता होनी चाहिए। हालांकि गोदाम में खाद के कट्टे सिर्फ एक हजार थे। ऐसे में किसानों को इस बात का आभास हो चुका था कि जो पहले खाद गोदाम के गेट तक पहुंच जाएगा वह पहले खाद पाएगा। वहीं, जो पीछे रह जाएगा उसे खाद नहीं मिलेगी। यही कारण रहा कि भीड़ में मौजूद हर किसान लाइन में सबसे आगे लगना चाहता था।
किसानों में धक्का-मुक्की और कपड़े फाड़े
खाद पाने की चाहत में किसान लाइन में आगे लगना चाहता था। इसी के चलते किसानों ने आपस में धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इस धक्का-मुक्की में जो किसान लाइन में आगे से पीछे हुए वह आपस में मारपीट पर उतर आए। कई किसानों ने आपस में एक दूसरे की पिटा तो है ही। साथ ही एक दूसरे के कपड़े भी फाड़ दिए। जब इस बात की जानकारी पुलिस को लगी तो पुलिस मौके पर पहुंच गई।
650 में से 350 किसान निराश लौटे
पुलिस ने किसी तरह मशक्कत कर किसानों को अलग करवा कर मामला शांत करवाया। वहीं, प्रशासन ने खाद कट्टों की संख्या कम देख एक आधारकार्ड पर एक किसान को पांच की जगह तीन-चार कट्टे बांटे। जिससे 650 किसानों में से करीब 300 किसानों को ही खाद मिल पाया।
क्या बोले अधिकारी अधिकारी
करैरा में खाद वितरण को लेकर किसानों के बीच हंगामा होने के बाद कोलारस तहसीलदार सचिन भार्गव ने बताया कि हमने करीब तीन सौ किसानों को एक हजार कट्टे खाद का वितरण कर दिया है। इसके अलावा जो किसान बचे हैं, उन्हें अगली बार रैक आने पर खाद का वितरण किया जाएगा।

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